एनबीएफसी को रोलओवर व आपस में जुड़े जोखिमों की निगरानी करने की जरूरत : CEA

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मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने गुरुवार को कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को अपने रोलओवर जोखिम और इंटरकनेक्टेड जोखिम की निगरानी करनी चाहिए और इसके साथ ही देश में वित्तीय समावेशन को और गहरा बनाने का प्रयास करना चाहिए। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) के पहले एनबीएफसी शिखर सम्मेलन में सुब्रमण्यन ने एनबीएफसी को ‘जोंबी’ ऋण देने के प्रति आगाह किया।

उन्होंने कहा, “प्रत्येक एनबीएफसी को अपने रोलओवर जोखिम और इंटरकनेक्टेड जोखिम पर नजर रखने की जरूरत है।”

भारत में एनबीएफसी सेगमेंट के रूप में उनका सुझाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र आईएल एंड एफएस संकट के बाद गंभीर तनाव में रहा है जो 2018 में प्रकाश में आया था।

सीईए ने प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उपयोग कहीं अधिक हो सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि यह वित्तीय क्षेत्र ही है, जिसे भारत की विकास गाथा (ग्रोथ स्टोरी) का नेतृत्व करना है।

न्यूज स्त्रसेत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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