नवीन पटनायक ने किया टाटा हॉकी अकादमी का उद्घाटन

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ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार को नवल टाटा हॉकी अकादमी का उद्घाटन किया। यह अकादमी एक हाई परफॉर्मेस सेंटर है जो राज्य के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करेगी। अकादमी कलिंगा स्टेडियम में स्थित है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं इस बात से खुश हूं कि आज हाइअर परफॉर्मेस सेंटर का उद्घाटन हुआ है।”

भुवनेश्वर के सुंदरगढ़ और राउरकेला स्थित सरकारी खेल हॉस्टल रिजनल डेवलपमेंटस सेंटर (आरडीसी) में तब्दील होंगे। टाटा ट्रस्ट और टाटा स्टील के एक्सपर्ट आरडीसी के साथ काम करेंगे।

खेल मंत्री तुषारकांती बेहेरा ने कहा कि भुवनेश्वर देश की खेल राजधानी के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने कहा, “इस हार परफॉर्मेस सेंटर की स्थापना से राज्य के युवाओं को आर्टिफिशियल टर्फ पर अच्छी ट्रेनिंग मिलेगी। इससे इन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की तैयारी करने में मदद मिलेगी।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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