मंत्र जाप: यहां पढ़ें ग्रहों के वैदिक मंत्र, शुभ फल की होगी प्राप्ति

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ज्योतिषशास्त्र और कुंडली में ग्रहों को विशेष महत्व दिया गया हैं वही कुंडली में इनके स्थान से जातक का जीवन प्रभावित होता हैं अगर ये ग्रह उचित स्थान पर होते है तो मनुष्य बेहतर, यश और कीर्ति से युक्त, साधन, संपन्न, वैभव, धन संपत्ति से परिपूर्ण जीवन जीता हैं वही अगर ग्रह नीच भाव में हो तो जीवन में कष्ट, अपयश, हानि, दरिद्रता, मृत्यु रोग जैसी बातें देखने को मिलती हैं, तो आज हम आपको ग्रहों को मजबूत बनाने के लिए ग्रहों से जुड़े वैदिक मंत्र लेकर आए हैं जिसका जाप करने से आपको लाभ की प्राप्ति होगी तो आइए जानते हैं

जानिए ग्रहों के वैदिक मंत्र—

सूर्य का मंत्र—

ओम आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो विनेशयन्नमृतं मत्र्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।

चंद्रमा का मंत्र—

ओम इमं देवा असपत्न सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठयाय महते जानराज्यायेनद्रस्येन्द्रियाय।इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोमी राजा सोमोस्मांक ब्राह्मणाना राजा।।

भौम का मंत्र—

ओम अ​ग्निर्मूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपा रेता सि जिन्वति।।

बुध का मंत्र—

ओम उद्बुण्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च। अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत।।

गुरु का मंत्र—

ओम बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

शुक्र का मंत्र—

ओम अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत्क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपान शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयो अमृतं मधु।।

शनि का मंत्र—

ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्त्रवन्तु न:।।

राहु का मंत्र—

ओम कया ​नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।

केतु का मंत्र—

ओम केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। समुषद्भिरजायथा:।।

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