नेशन्स लीग : इटली ने पोलैंड से खेला ड्रॉ

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इटली ने यूरोपीय नेशन्स लीग के अपने पहले मुकाबले में यहां शुक्रवार को पोलैंड के खिलाफ 1-1 से रोमांचक ड्रॉ खेला। अक्टूबर 2017 के बाद से इटली का यह पहला आधिकारिक मैच है। रेनाटो डाल एरा स्टेडियम में हुए इस मैच को देखने करीब 20,000 दर्शक पहुंचे।

इटली ने नए कोच रोबटरे मैनचिनी के मार्गदर्शन में अच्छी शुरुआत की लेकिन पोलैंड के डिफेंस ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करने हुए मेजबान टीम को शुरुआती बढ़त नहीं बनाने दी। मैच के 40वें मिनट में पिओटर जिलिंस्की ने गोल करते हुए पोलैंड को 1-0 से आगे कर दिया।

दूसरे हाफ में भी इटली ने आक्रणम किए लेकिन मेहमान टीम के डिफेंस को भेदने में उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। 78वें मिनट में इटली को पेनाल्टी मिली जिसे गोल में बदलकर जॉर्जिन्हो ने मेजबान टीम की हार टाल दी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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