नरेंद्र बत्रा ने खेल के विभिन्न मुद्दों को लेकर रिजिजू से मुलाकात की

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भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू से शनिवार को मुलाकात की और मौजूदा समय में खेल के विभिन्न मुद्दों पर उनसे चर्चा की। बत्रा और रिजिजू के बीच खेल के जिन मुद्यों पर बातचीत हुई, उनमें जिम्नास्टिक मुद्दा, आईओए के साथ स्पोर्ट्स कोड, भारत में 2023 में होने वाले आईओसी कांग्रेस के लिए आईओसी मूल्यांकन प्रतिनिधिमंडल का दौरा और टोक्यो ओलम्पिक-2020 के दौरान टोक्यो में इंडिया हाउस के संदर्भ में बैठक जैसे मुद्दे शामिल थे।

बत्रा ने खेल मंत्री के साथ मुलाकात के बाद कहा कि यह काफी लाभदायक और सकारात्मक बैठक रही। उन्होंने कहा कि खेल मंत्री के साथ बातचीत करना हमेशा सकारात्मक रहता है।

आईओए के अध्यक्ष बत्रा ने इससे पहले 2022 में बर्मिघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से निशानेबाजी को हटाने को लेकर भी खेल मंत्री रिजिजू से मुलाकात की थी। उन्होंने यह मुलाकात पिछले महीने ही की थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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