फिटनेस के प्रति महेश बाबू के रूझान को देख प्रभावित हुईं नम्रता

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तेलुगू फिल्मों के सुपरस्टार महेश बाबू लॉकडाउन की इस अवधि में अपने परिवार संग खूब वक्त बिता रहे हैं और इसके साथ ही साथ वह अपने फिटनेस पर भी पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं और इस दिशा में उनके रूझान को देखकर उनकी पत्नी व अभिनेत्री नम्रता शिरोडकर काफी प्रभावित हैं। नम्रता ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें महेश बाबू ट्रेडमिल पर पसीना बहाते हुए नजर आ रहे हैं।

अभिनेत्री ने रेड हार्ट इमोजी के साथ इसके कैप्शन में लिखा, “परफेक्शन की दिशा में दौड़ लगाया जा रहा है..एक्सरसाइज का डेली डोज!! हैशटैगस्टेफिट हैशटैगलॉकडाउनडायरीज हैशटैगस्टेहोम।”

इससे एक दिन पहले नम्रता ने एक पुरानी तस्वीर शेयर की थीं, जिसमें महेश अपने बेटे गौतम को बांहों में लिए नजर आ रहे थे।

इस सेलेब्रिटी जोड़े की एक बेटी भी है, जिनका नाम सितारा है। साल 2005 में महेश बाबू और नम्रता ने एक-दूसरे से शादी की और तब से ये साथ में एक खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं।

महेश बाबू आखिरी बार एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘सरिलेरु नीकेवरु’ में नजर आए थे, जो साल की शुरूआत में आई थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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