मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई : सर्जियो रामोस

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स्पेनिश क्लब रियल मेड्रिड के कप्तान सर्जियो रामोस ने माना कि इस वर्ष लिवरपूल के खिलाफ हुए यूरापीय चैम्पियंस लीग फाइनल के बाद उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। स्पेन ने यहां शनिवार देर रात हुए यूरोपीय नेशन्स कप के अपने पहले मुकाबले में इंग्लैंड को 2-1 से हराया। रामोस स्पेन की राष्ट्रीय टीम के भी कप्तान हैं।

‘ईएसपीएन’ के अनुसार, इंग्लिश क्लब लिवरपूल के खिलाफ हुए फाइनल मुकाबले में स्टार फारवर्ड मोहम्मद सलाह और रामोस की बीच टक्कर हुई थी, जिसके बाद सलाह को कंधे की चोट के कारण मैच से बाहर होना पड़ा और फीफा विश्वकप में भी वह 100 प्रतिशत फिट नहीं थे।

रामोस ने कहा, “इंग्लैंड के खिलाफ मैदान पर उतरते समय दर्शकों ने मेरा अच्छे से स्वागत नहीं किया, लेकिन मैं इन सब चीजों का प्रभाव अपने खेल पर नहीं पड़ने देता। सभी को यह याद है कि फाइनल में मैंने सलाह को गिराया, लेकिन किसी को भी याद नहीं कि मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई थी।”

उन्होंने कहा, “यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है, लोग भले ही इसे एक मजाक के तौर पर ले सकते हैं, लेकिन मुझे सच्चाई पता है और मुझे किसी को स्पष्टीकरण देने की जरूरत नहीं है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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