मेरी बायोपिक जादू-टोने की तरह : शिया लाबियॉफ

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अभिनेता शिया लाबियॉफ का कहना है कि उनकी बायोपिक ‘हनी बॉय’ बनाना एक जादू-टोने की तरह था। ‘हनी बॉय’ में लाबियॉफ के अशांत बचपन की कहानी बताई गई है, क्योंकि अभिनेता शराबी और ड्रग्स के आदी पिता के साथ पला-बड़ा था। लाबियॉफ ने इस फिल्म की कहानी को रिहैब में रहने के दौरान लिखा था, और वह इस फिल्म के स्टार भी हैं। उन्होंने अपनी कहानी को अपने दोस्त और निर्देशक अल्मा हरेल से साझा किया, और उसी दोस्त ने इस फिल्म को बनाया है।

वैरायटी डॉट कॉम ने लाबियॉफ के बयान का हवला देते हुए बताया, “मैंने जो कुछ लिखा था, उसे भेज दिया। अपने अतीत के बारे में लिखी गई बातों को पढ़कर उसने कहा ‘अरे, ये तो एक फिल्म की तरह है’।”

‘हनी बॉय’ फिल्म में अभिनेता के, अपने पिता के साथ एक हॉलीवुड मोटेल में रहने से लेकर, सिगरेट और मारिजुआना के साथ उनका जुड़ाव, बाल स्टार बनने के बाद अपनी प्रसिद्धि के नशे में ड्रग्स के साथ संघर्ष तक के सफर को दिखाया गया है।

लाबियॉफ के लिए ‘हनी बॉय’ एक चिकित्सा पद्धति की तरह है।

अभिनेता ने कहा, “आपने मेरे डर को भगा दिया। यह एक तरह से जादू-टोने की तरह है।”

न्यूज स्त्राते आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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