एक बार जरूर जाएं भारत के सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय मंदिर में

भगवान शिव क मना करने वाल को काशी को ना जानने वाला शायद ही कोई व्यक्ति हैं। भारत का सबसे पुराना शहर और गंगा के किनारे स्थित वाराणसी का यह मंदिर, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

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जयपुर। भगवान शिव क मना करने वाल को काशी को ना जानने वाला शायद ही कोई व्यक्ति हैं। भारत का सबसे पुराना शहर और गंगा के किनारे स्थित वाराणसी का यह मंदिर, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऐसा कहा जाता हैं कि काश जाने के बाद सबकी आत्मा शुद्ध हो जाती हैं और यही कारण हैं कि यहां पर कोई भी भक्त जाने से मना नहीं करता हैं और यहां पर सालभर पर्यटकों की भीड लगी हुई रहती हैं। मंदिर की आध्यात्मिक महिमा केवल हिंदू धर्मग्रंथों के उल्लेख से या यहाँ आने वाले तीर्थयात्रियों द्वारा नहीं जानी जाती है, लेकिन यह शायद एकमात्र ऐसा मंदिर है जो अत्याचारी मुगल शासक औरंगजेब द्वारा नष्ट किए जाने के बाद भी जीवित रहा।

इसके अलावा अन्नपूर्ण देवी, गंगा घाट, भैरों मंदिर आदि के मंदिर भी यहां पर स्थित हैं। मंदिर परिसर के पास अनाज क्षेत्र का निर्माण एक और मुख्य आकर्षण है जो आने वाले वर्षों में विकसित होगा। अगर प यहां पर पहली बार जा रहे हो तो हम आपको बताने जा रहें हैं कि आप यहां पर कैसे पहुँच सकते हैं।

यहां पर वजाने के ले काफी सारी प्राईवेट बसें हैं। इसके लिए पहले आपको रिक्शा से लोहारी तोला पहुँचना होगा। आपको वहां काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रवेश द्वार दिखाई देगा। अंदर जाकर आप विश्वनाथ गली नामक पतली गली से गुजरेंगे। यहां आपको मिठाई और पूजा सामग्री की कई छोटी दुकानें मिलेंगी।

वाराणसी सिटी स्टेशन मंदिर से सिर्फ 2 किमी दूर है, जबकि वाराणसी जंक्शन की दूरी लगभग 6 किमी है। मंदिर से 17 किमी दूर मुगल सराय रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा मंडुआडीह स्टेशन 4 किमी दूर है। ये सभी स्टेशन भारत के अन्य शहरों से जुड़े हुए हैं। लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी 20 से 25 किमी है। पर्यटक एयरपोर्ट से टैक्सी या कैब लेकर मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

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