मुश्ताक अली ट्रॉफी : महाराष्ट्र को हराकर कर्नाटक बना विजेता

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मयंक अग्रवाल (नाबाद 85) और सलामी बल्लेबाज रोहन कदम (60) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर कर्नाटक ने गुरुवार को होल्कर क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए फाइनल मैच में महाराष्ट्र को आठ विकेट से मात देकर सैयद मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया। महाराष्ट्र ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में चार विकेट के नुकसान पर 155 रन बनाए थे। कर्नाटक ने 18.3 ओवरों में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

कर्नाटक को शुरुआत अच्छी नहीं मिली। उसने 14 के कुल स्कोर पर बी.आर. शरथ (2) के रूप में अपना पहला विकेट खो दिया। इसके बाद कदम और मयंक ने 92 रनों की साझेदारी की। कदम 106 के कुल स्कोर पर दिव्यांग हिमगानेकर का शिकार हो गए। उन्होंने 39 गेंदों की पारी में चार चौके और तीन छक्के मारे।

मयंक ने करुण नायर (नाबाद 8) के साथ मिलकर टीम को खिताबी जीत दिलाई। मयंक ने 57 गेंदों की पारी में छह चौके और तीन छक्के मारे।

इससे पहले, कर्नाटक ने टॉस जीतकर महाराष्ट्र को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। महाराष्ट्र ने अपने तीन विकेट महज 55 रनों पर ही खो दिए। इसके बाद नौशाद शेख ने 41 गेंदों पर पांच चौके और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 69 रनों की पारी खेल टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। इसमें अंकित बवाने (29) ने उनका अच्छा साथ दिया। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 84 रनों की साझेदारी की। कप्तान राहुल त्रिपाठी ने 30 रन बनाए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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