मुंबई : स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस से 143 करोड़ की ठगी

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स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस (एसबीएम) की मुंबई शाखा को 143 करोड़ रुपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है। हैकर्स ने बैंक के खातों से लगभग 143 करोड़ रुपये की ठगी की है।

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) में बीते सप्ताह दर्ज कराई गई बैंक की शिकायत के अनुसार, घटना एसबीएम की नरीमन प्वॉइन्ट शाखा में हुई थी।

एसबीएम ने कहा कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने अवैध रूप से विभिन्न खातों तक पहुंचने के लिए हमारे सर्वर को हैक किया और देश के बाहर कई खातों में पैसा स्थानांतरित करने में कामयाब रहे।

ईओडब्ल्यू और साइबर सेल विशेषज्ञ मामले की जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही एसबीएम खुद भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इसमें कोई कंपनी के किसी अंदरूनी शख्स हाथ है या नहीं।

दो अक्टूबर को एसबीएम ने एक बयान में कहा कि भारत में बैंक के साथ साइबर ठगी की गई है जिससे बैंक को 1.4 करोड़ डॉलर की चपत लगी है।

बैंक ने हालांकि आश्वासन दिया कि किसी भी ग्राहक को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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