मुंबई पुल हादसा : 6 की मौत, बीएमसी-रेलवे के खिलाफ मामला दर्ज

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यहां छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बाहर एक फुट ओवर ब्रिज का हिस्सा ढहने के बाद पिछले 12 घंटों में छह लोगों की मौत हो गई और 32 लोग घायल हो गए। पुलिस ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और भारतीय रेलवे के अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मृतकों को परिजनों के लिए पांच-पांच लाख रुपये देने और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने गुरुवार को हुई इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने का भी आदेश दिया है।

रेलवे, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और बीएमसी की टीमें शुक्रवार को घटनास्थल का मुआयना कर रही हैं।

बीएमसी आपदा नियंत्रण ने कहा, “पिछले 18 महीनों में शहर में फुटओवर ब्रिज गिरने गिरने की यह तीसरी घटना है। यह घटना गुरुवार शाम 7.35 पर तब घटी, जब पुल पर जरूरत से ज्यादा लोगों का वजन बढ़ गया।”

अब तक पांच मृतकों की पहचान अपूर्वा प्रभु (35), रंजना तांबे (40), भक्ति शिंदे (40), जाहिद सिराज खान (32) और तपेंद्र सिंह (35) के रूप में हुई है।

ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि मलबा हटाने के बावजूद डी.एन. मार्ग पर यात्रा करने पर प्रतिबंध है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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