मोटरस्पोर्ट्स : डोवीजियोसो ने जीता सैन मारिनो खिताब

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इटली निवासी और डुकाटी के मोटोजीपी राइडर आंद्रे डोविजियोसो ने रविवार को मोटोजीपी सैन मारिनो ग्रां प्री खिताब जीत लिया। स्पेन के मार्क मारक्वेज (रेप्सोल होंडा) दूसरे स्थान पर रहे। मारक्वेज 221 अंकों के साथ अभी भी तालिका में शीर्ष पर हैं। डोविजियोसो ने यहां मार्को सिमोनसेली सर्किट में 42 मिनट 5.426 सेकेंड के साथ पहला स्थान हासिल किया।

डोविजियोसो मारक्वेज से 2.822 सेकेंड और तीसरे स्थान पर रहने वाले इंग्लैंड के काल क्रुच्लोव (एलसीआर होंडा केस्ट्रोल) से 7.289 सेकेंड आगे रहे।

इस जीत के साथ ही डोविजियोसो अब एक स्थान ऊपर चढ़कर 154 अंकों के साथ तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

डोविजियोसो हमवतन वालेंटिनो रोसी (मोवीस्टार याम्हा) से तीन अंक आगे निकल गए हैं। रोसी यहां सातवें स्थान पर रहे।

यहां पॉल पोजिशन से रेस की शुरुआत करने वाले स्पेन के जॉर्ज लोरेंजो (डुकाटी) 17वें स्थाप पर रहे। रेस में केवल दो लैप ही बचे थे कि लोरेंजो दुर्घटना के शिकार हो गए। लोरेंजो अब तालिका में 130 अंकों के साथ चौथे स्थान पर हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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