मानवीय भूल से ज्यादातर डाटा लीक होती है : आईबीएम

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प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम ने गुरुवार को एक रिपोर्ट में कहा कि मानवीय भूल से ज्यादातर डाटा लीक होती है। आईबीएम की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि 2017 में डाटा में सेंधमारी के मामलों में 25 फीसदी कमी आई लेकिन क्लाउड से संबंधित साइबर हमलों में 424 फीसदी का उछाल आया जोकि बहुधा मानवीय भूल के कारण हुए थे।

आईबीएम सेक्योरिटी की रिपोर्ट ‘2018 आईबीएम एक्स-फोर्स थ्रेट इंटेलीजेंस इंडेक्स’ के अनुसार, साइबर अपराधी अब रैनसमवेयर और घातक हमले में संलिप्त हो गए हैं और पिछले साल कथित तौर पर 2.9 अरब रिकॉर्ड में सेंधमारी की गई। जबकि उससे एक साल पहले 2016 में चार अरब डाटा लीक हुई थी।

आईबीएम एक्स फोर्स इंसिडेंट रिस्पांस एंड इंटेलीजेंस सर्विसेस (आईआरआईएस) के वैश्विक प्रमुख वेंडी व्हिटमोर ने कहा, “पिछले साल अपराधी डाटा चुराने के बजाय रैनसमवेयर हमले से डाटा लॉक करने व डिलीट करने में लिप्त पाए गए।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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