मोर्गन को टीम में रहना चाहिए : जोए रूट

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इंग्लैंड की टेस्ट टीम के कप्तान जोए रूट ने कहा कि उनकी राष्ट्रीय टीम के सीमित ओवरों के कप्तान इयोन मोर्गन एक शानदार कप्तान हैं और उन्हें अपने आप को टीम से बाहर नहीं करना चाहिए।

मोर्गन ने हाल ही में कहा था कि अगर उनके बाहर जाने से टीम को अगले साल होने वाले विश्व कप में फायदा होता है तो वह अपने आप को बाहर करने के लिए तैयार हैं।

मोर्गन ने हाल ही में टीम में सकारात्मक बदलाव लाया है और वनडे में टीम को नंबर-1 रैंकिंग पर पहुंचा दिया है।

बीबीसी ने रूट के हवाले से लिखा, “मेरा मानना है कि उनके मैदान पर रहने से काफी फायदा होता है।”

रूट से जब मोर्गन के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं इससे हैरान नहीं हुआ। अगर मैं उनकी जगह होता तो मैं ऐसा नहीं करता क्योंकि वह टीम में काफी योगदान देते हैं, लेकिन जब उनका यह बयान आया तो मैं इससे हैरान नहीं था। वह इसी तरह के इंसान हैं।”

रूट ने कहा, “व्यक्तिगत तौर पर कहूं तो उनका मैदान पर होना टीम को मजबूत बनाता है।”

मोर्गन ने 2015 विश्व कप के बाद टीम की कमान संभाली थी। इंग्लैंड का पिछले विश्व कप में प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, लेकिन मोर्गन के कप्तान बनने के बाद से टीम में काफी बदलाव आए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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