आधे से ज्यादा ब्राजील वासियों को नहीं है फीफा विश्व कप में दिलचस्पी

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फुटबाल के दिवाने देश के लोग जब यह कहें कि उन्हें फीफा विश्व कप में रूचि नहीं है तो हैरत होती है, लेकिन 53 प्रतिशत ब्राजील को गुरुवार से शुरू हो रहे इस बड़े टूर्नामेंट में हकीकत में कोई दिलचस्पी नहीं है। यह जानकारी डाटाफोल्हा सर्व ने मंगलवार को जारी की।

जिन लोगों से प्रतिक्रिया ली गई उनमें से सिर्फ 19 फीसदी लोगों ने कहा है कि वह फीफा विश्व कप का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जबकि अन्य 18 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें इस टूर्नामेंट में ठीक-ठाक दिलचस्पी है। नौ फीसदी लोगों ने कहा है वह बहुत कम इस टूर्नामेंट पर ध्यान दे रहे हैं।

यह सर्वे पिछले सप्ताह लिया गया था जिसमें 174 शहरों से 2,824 लोगों की प्रतिक्रियाएं ली गई थीं। सर्वे के मुताबिक, विश्व कप में कई लोगों की रूचि जनवरी से कम हो गई है। तब 42 फीसदी लोगों ने कहा था कि उन्हें इस टूर्नामेंट से मतलब नहीं है। पांच बार की विश्व विजेता ब्राजील इस साल होने वाले विश्व कप में जीत की प्रबल दावेदारों में से एक है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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