रूस में विरोध प्रदर्शनों में 800 से अधिक लोग पुलिस हिरासत में

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रूस में सरकार द्वारा प्रस्तावित पेंशन योजना में संशोधन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए पुलिस ने 839 लोगों को हिरासत में लिया। रूस के एक स्वतंत्र मॉनिटरींग समूह ने यह जानकारी दी।

प्रदर्शनकारी देश में सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के सरकार के प्रस्ताव के विरोध में रविवार को देशभर में रैलियों में इकट्ठा हुए। ये विरोध प्रदर्शन विपक्षी नेता एलेक्सी नावल्नी के समर्थकों द्वारा आयोजित किए गए।

स्वतंत्र स्थानीय मीडिया के मुताबिक, रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीर्ट्सबर्ग में सर्वाधिक लोग हिरासत में लिए गए। सेंट पीर्ट्सबर्ग में इन विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें जल्दी ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

एक फोटोग्राफर ने ‘सीएनएन’ को पुष्टि की कि उसने दो लोगों की गिरफ्तारी की तस्वीरें ली हैं, जिसमें एक स्कूल जाने वाली उम्र का लड़का और एक वृद्ध शामिल हैं।

स्वतंत्र टेलीविजन चैनल ‘टीवी रेन’ ने कहा कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज में उनका एक संवाददाता घायल हो गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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