5,500 से ज्यादा तीर्थयात्री अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना

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जम्मू से 5,522 तीर्थयात्रियों का एक जत्था गुरुवार को अमरनाथ गुफा के लिए रवाना हुआ। पिछले तीन दिनों में करीब 33,694 यात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा सहित दो काफिले घाटी के लिए रवाना हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2,520 यात्री बालटाल बेस कैंप के लिए जबकि 3,002 यात्री पहलगाम के बेस कैंप के लिए रवाना हुए हैं। मौसम विभाग ने दोनों रास्तों पर मौसम सही रहने का पूर्वानुमान जताया है।

वार्षिक अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 1 जुलाई से शुरू हुई, जो 45 दिन बाद, 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन समाप्त होगी।

श्रद्धालुओं के अनुसार, समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाली बर्फ की विशाल संरचना भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों की प्रतीक है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, बूटा मलिक नामक एक मुस्लिम चारवाहे ने 1850 में इस पवित्र गुफा की खोज की थी। एक सूफी संत ने चारवाहे को कोयले का बोरा दिया था, जो सोने में परिवर्तित हो गया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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