madhya pradesh में कोरोना के 2 हजार से ज्यादा मरीज बढ़े, अब तक 2316 मौतें

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मध्यप्रदेश में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के दो हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। राज्य में कोराना से अब तक 2316 मरीजों की मौत हो चुकी है, वहीं एक लाख चार हजार से ज्यादा मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुधवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, बीते 24 घंटों में 2004 मरीजों की संख्या बढ़ी है, कुल मरीजों की संख्या एक लाख 28 हजार 47 हो गई है। राज्य में सबसे ज्यादा 482 नए मरीज इंदौर में मिले हैं, यहां कुल मरीजों की संख्या 24006 हो गई है। वहीं भोपाल में 278 मरीज बढ़े हैं। यहां कुल मरीज 17408 हो गए हैं। इसी तरह ग्वालियर में 123 और जबलपुर में 176 मरीज मिले हैं।

राज्य में बीते 24 घंटों में 35 मरीजों की मौत हुई है। इस तरह मरने वाले मरीजों की संख्या 2316 हो गई है। अब तक एक लाख 4734 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में सक्रिय मरीजों की संख्या 20997 है। बीते 24 घंटों में 2004 मरीज बढ़े हैं तो इसी अवधि में 2289 मरीज स्वस्थ हुए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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