रांची में 1 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी का प्रस्ताव दिया गया

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रांची में करीब एक लाख युवाओं को निजी क्षेत्रों में नौकरी प्रदान करने के उद्देश्य से गुरुवार को यहां ग्लोबल स्किल समिट का आयोजन किया गया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस समिट के दौरान 106,619 युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए सांकेतिक ऑफर लेटर प्रदान किए गए।

यह आयोजन मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने कराया। मुख्यमंत्री ने कहा, “झारखंड ने कौशल विकास के क्षेत्र में इतिहास बनाया है। मैं झारखंड और कॉपोर्रेट क्षेत्र की टीम को धन्यवाद देता हूं। मैं उन एक लाख युवाओं को शुभकामनाएं देता हूं, जिन्हें नौकरी मिली और उनके बेहतर भविष्य की कामना करता हूं।”

केंद्रीय मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की और ग्लोबल स्किल समिट को नौकरी के अवसरों का ‘कुंभ’ बताया।

झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने अपने संबोधन में झारखंड के युवाओं के मेहनती, विश्वसनीय और कड़ी मेहनत करने के गुणों पर प्रकाश डाला। आयोजन में कुल 17 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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