अवॉर्ड की तुलना में लोगों के प्यार के अधिक मायने : बॉबी देओल

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फिल्म ‘रेस 3’ में नजर आने वाले अभिनेता बॉबी देओल का कहना है कि उनके लिए पुरस्कारों की तुलना में लोगों का प्यार और सहयोग अधिक मायने रखता है। बॉबी यहां मंगलवार को आईफा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए, जहां उनसे इस बारे में सवाल पूछा गया।

बॉबी ने कहा, “मैं अपने पिता (धर्मेद्र) को अपने देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रतिभाशाली कलाकारों में से एक मानता हूं, जिन्हें कभी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार नहीं दिया गया। उन्हें अपने प्रशंसकों से बहुत प्यार और प्रशंसा मिली और मेरे प्रशंसकों का मेरे प्रति भी यही रुख है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं यहां हूं क्योंकि लोग मुझसे प्यार करते हैं और मुझे देखना चाहते हैं।”

बॉबी सात वर्षो के बाद इस महीने आईफा में प्रस्तुति देंगे। यह पूछने पर कि क्या वह ‘नर्वस’ हैं? इस पर ‘सोल्जर’ अभिनेता ने कहा, “नहीं। मैं बिल्कुल नर्वस नहीं हूं। मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। मैंने कुछ साल काम नहीं करके बहुत कुछ खोया है इसलिए अब मैं यह करना चाहता हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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