मानसून सत्र: बिना लोकतांत्रिक बहस और विपक्ष के लगातार विरोध के बीच संसद में पास हो गए विवादित बिल

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कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बीच आयोजित संसद का ऐतिहासिक मानसून सत्र बुधवार को तय समय से पहले समाप्त कर दिया गया। राज्यसभा में सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदन के 252वें सत्र और बाद में लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला ने 17वीं लोकसभा के चौथे सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

एक अक्टूबर को ख़त्म होने वाले इस सत्र को तय वक़्त से आठ दिन पहले ही ख़त्म कर दिया गया।10 दिनों तक चले इस सत्र में लोकसभा में 25 विधेयक पारित किए गए और 16 नए विधेयक पेश किए गए।वहीं राज्यसभा में भी 25 विधेयक पारित हुए और छह नए विधेयक पेश हुए।

संसद का यह मानसून सत्र कई तरह से ऐतिहासिक रहा। सत्र में पहली बार सांसदों ने रात भर संसद परिसर के अंदर धरना दिया,सत्र से पहले सांसदों की कोरोना जाँच हुई,सदन ने शनिवार और रविवार को भी काम किया।इस सत्र में ज़बरदस्त हंगामा भी हुआ, विरोध प्रदर्शन भी हुआ और सांसदों का निलंबन भी हुआ।

आपको बता दें की विपक्ष की ग़ैर-मौजूदगी के बीच मंगलवार-बुधवार को राज्यसभा में सात बिल बिना लोकतात्रिंक बहस के ही पास हो गए।इनमें लेबर कोड और एफ़सीआरए यानी फ़ॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट जैसे विवादित बिल भी पास किए गए।
इसके अलावा इस ऐतिहासिक मानसून सत्र में कई विवादित विधेयक पारित हुए जिसमें फ़ॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट 2020,आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) 2020,लेबर कोड बिल,बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) बिल 2020 तथा कंपनी (संशोधन) बिल 2020 आदि शामिल हैं।

बिना बहस के बिल पारित होने के अलावा भी ये सत्र कई मायनों में यादगार रहा।

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