मोनाको ने कोच जार्दिम को पद से हटाया, जानिए क्यों ?

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फ्रेंच क्लब मोनाको एफसी ने इस सीजन लीग में जारी खराब प्रदर्शन के कारण टीम के मुख्य कोच लेयोनाडरे जार्दिम को उनके पद से हटा दिया है। बीबीसी के अनुसार, मोनाको नौ मैचों के बाद छह अंकों के साथ तालिका में 18वें पायदान पर काबिज है और कयास लगाए जा रहे हैं कि फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के साथ फीफा विश्व कप का खिताब जीत चुके स्टार फारवर्ड थिएरी हेनरी क्लब के नए कोच हो सकते हैं।

41 वर्षीय हेनरी ने मोनाको के साथ ही अपने करियर की शुरुआत की थी और 1997 में टीम को फ्रेंच लीग का खिताब दिलाया था।

जार्दिम को 2014 में क्लब का कोच बनाया गया था और उन्होंने 2017 में 17 साल बाद टीम को लीग के खिताब तक पहुंचाया था। उनके मार्गदर्शन में क्लब ने 2016-17 यूरोपीय चैम्पियंस लीग के सेमीफाइनल तक का सफर भी तय किया।

पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) के लिए बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे युवा खिलड़ी कीलियन एम्बाप्पे का विकास भी जार्दिम के मार्गदर्शन में ही हुआ।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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