मोदी ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 99वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 99वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह भविष्यवादी दृष्टिकोण से समृद्ध थी और कई लोगों की प्रेरणा स्रोत थीं। मोदी ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, “हम राजमाता विजयाराजे सिंधिया को उनकी जयंती पर याद कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी लोगों की सेवा में समर्पित की। वह बहादुर, दयालु और देश के लिए एक भविष्यवादी ²ष्टि से समृद्ध थीं। वह कई लोगों की प्रेरणास्रोत थीं।”

मोदी ने नमो ऐप पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपनी हालिया बातचीत की तस्वीरें और एक वीडियो को साझा करते हुए कहा, “उन्होंने नेताओं की धमकियों और चालों के बावजूद आपातकाल का विरोध किया।”

विजयाराजे सिंधिया का जन्म 12 अक्टूबर 1919 को हुआ था। उनका असली नाम लेखा दिव्येश्वरी देवी था लेकिन ग्वालियर के महाराजा जीवाजीराव सिंधिया से वर्ष 1941 में शादी करने के बाद वह ग्वालियर की राजमाता कहलाईं। वह पहले कांग्रेस में थीं लेकिन बाद में जनसंघ में शामिल हो गईं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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