विफलता छिपाने मंदिर मुद्दा उठा रही मोदी सरकार : माकपा

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मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस)-भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को गहरा करने और मोदी सरकार की ‘चहुमुंखी विफलता’ को छिपाने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर का मुद्दा उठा रही है। माकपा ने भाजपा-आरएसएस के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा दिए गए ‘डरावने बयान’ पर चिंता व्यक्त की, जिसमें ‘1992 जैसी स्थिति’ पैदा करने को लेकर धमकाया जा रहा है। पार्टी ने अपने बयान में इसे देश की एकता के लिए ‘गंभीर खतरा’ बताया है।

पार्टी के अनुसार, “भाजपा ने आधिकारिक रूप से कहा था कि वह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करेगी। अयोध्या विवाद पर लोगों की आकांक्षाओं को उभार कर और मंदिर निर्माण की मांग को उठा कर भाजपा व आरएसएस का लक्ष्य देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को और गहराने का है, जिसके भयानक परिणाम होंगे।”

बयान के अनुसार, “सभी क्षेत्रों में विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाने के अलावा मोदी सरकार चुनाव लड़ने के लिए हिंदू सांप्रदायिक वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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