रेल हादसों से सबक नहीं ले रही मोदी सरकार : रालोद

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राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने रायबरेली रेल हादसे पर दुख व्यक्त किया है और कहा कि मोदी सरकार की लापरवाही से देश में रेल हादसों की बाढ़ आ गई है, पर सरकार मंदिर-मस्जिद मसले में उलझाकर लोगों का ध्यान इससे भटकाने में लगी है। पार्टी ने रेलमंत्री की ओर से घोषित मुआवजे को नाकाफी बताया और मृतक आश्रितों को 50-50 लाख और गंभीर घायलों को 5-5 लाख और मामूली घायलों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने रायबरेली हादसे पर दख जताते हुए कहा कि पूर्व की दुर्घटनाओं से यदि रेल मंत्रालय ने सबक लेकर सुरक्षा के प्रबंध किए होते तो आज दुर्घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद रेल दुघर्टनाओं में बाढ़ सी आ गई है और रेल मंत्रालय हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रेल घटनाएं रेलवे विभाग की बदइंतजामी का परिणाम है। जनता को बुलेट ट्रेन का ख्वाब दिखाने वाले लोग अपने देश में फैली हुई रेल लाइनों के रखरखाव में नाकाम साबित हो चुके हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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