दोबारा सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने माना, बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ज्यादा

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जयपुर। लोकसभा चुनावों से पहले 31 जनवरी 2019 को एक अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड में खबर छपी और उसमें बताया गया कि इस देश में बेरोजगारी दर पिछले 45 सालों की सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर है. आपको बता दें कि यह आंकड़े एनएसएसओ के आंकड़ों के हवाले से दिए गए थे.

जब की रिपोर्ट सामने आई थी उस देश में चुनाव का माहौल था और ऐसे वक्त में सरकार इस रिपोर्ट को पीछे खींचते हुई नजर आई और सरकार इस पर चुप्पी साध ली और इस रिपोर्ट पर कई सवालिया निशान भी खड़े हो गए वहीं रिपोर्ट छपने के बाद खूब हो-हल्ला भी हुआ और विपक्ष ने सरकार पर आरोप भी लगाया कि यह जानबूझकर इस आंकड़े को छिपा रही है वहीं राहुल गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा चुनाव में बेरोजगारी को मुद्दा बनाने की कोशिश भी करी लेकिन बेरोजगारी मुद्दा नहीं बन सकी.

वहीं अब चुनाव के खत्म होने के बाद नतीजे आने के बाद और सरकार की शपथ लेने के बाद 31 मई 2019 को सरकार बन गई और उसकी कैबिनेट की मीटिंग हो जाने के बाद केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय ने डाटा जारी कर दिया है और जो डाटा पहले लीक होता हुआ बताया जा रहा था उस डाटा को मानते हुए सरकार ने यह मान लिया है कि इस वक्त देश में 45 सालों की सबसे अधिक बेरोजगारी है.

आपको बता दें कि इस दौरान देश में 2017 और 18 का आंकड़ा सामने आया जिसमें देश की बेरोजगारी दर 6.1% थी वहीं शहरों में बेरोजगारी दर गांवों से अधिक है. आपको बता दें कि 7.8 फीसद शहरी युवा बेरोजगार है. वहीं गांवों में यह आंकड़ा 5.3 फीसद का बताया जा रहा है. वहीं महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में बेरोजगारी अधिक है पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.2 फीसद है जबकि महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.7 फीसद है.

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