मोदी सरकार पर आ सकती है ये मुसीबत, यूरोपीय संसद से ख़त्म हो सकते है सभी समझौते

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जयपुर। यूरोपीय संसद के नौ सदस्यों ने शुक्रवार को यूरोपीय आयोग से आग्रह किया कि नई दिल्ली के साथ सभी समझौतों को रद्द कर दिया जाए। सभी 9 सांसदों का मानना है की भारत सरकार जब गिरफ्तार हुए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को छोड़ नहीं देती तब तक के लिए सभी समझोतों को ख़त्म कर दिया जाए। उनका कहान है की ये लोग समाज के हाशिए पे पड़े लोगों के लिए काम कर रहे है।

यूरोपीय संघ के शीर्ष विदेश नीति राजनयिक को लिखे एक पत्र में, सांसदों ने 28 अगस्त को भारत के कई शहरों में 10 कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि पांच कार्यकर्ताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया था ।

यूरोपीय संसद लिडिया सेनरा, एंजला वलिना, पालोमा लोपेज़, मरजा किलोनन, एना गोम्स, क्लारा एगुइलेरा, सिप्रियन तनसेस्कु, क्लाउड मोरास और जूली वार्ड के सदस्यों ने इस बयान पर हस्ताक्षर किए। इसे विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के लिए यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि फेडेरिया मोगेरिनी को दिया गया था।

उन्होंने कहा कि ये गिरफ्तारी भारत के लोकतंत्र के लिए खतरा है और सभी को रिहा कर दिया जाना चाहिए।

आपको बता दे की भीम कोरेगांव हिंसा के सिलसिले में पूरे देश में पुणे पुलिस ने छापे मार 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये छापे मुंबई, रांची, हैदराबाद, फरीदाबाद, दिल्ली और ठाणे में किए गए थे।

जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है उनके नाम वारावरा राव, अरुण फेरेरा, गौतम नवलाखा, वर्णन गोंसाल्व और सुधा भारद्वाज है। पुलिस ने इन सभी आरोपीयों को धारा 153 ए, 505 (1) बी, 117,120 बी, 13,16,18,20,38,39,40 आईपीसी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है।

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