‘हत्या’ के लिए परिजन जेल गए या नहीं, पता लगाने लौटे ‘लापता’ महिला

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उत्तर प्रदेश में डेढ़ साल पहले लापता हुई महिला केवल यह पता लगाने के लिए सामने आई कि उसके परिवार के लोग उसकी हत्या के मामले जेल में हैं या नहीं। दरअसल, अमरोहा पुलिस महिला के लापता होने के मामले को सुलझाने में असफल रही थी। लिहाजा पुलिस ने महिला के पिता सुरेश, भाई रूप किशोर और एक रिश्तेदार दिनेश को दिसंबर 2019 में उसकी ‘ऑनर किलिंग’ के लिए जेल में डाल दिया था। पुलिस ने दावा किया था कि उनके पास अभियुक्तों के कबूलनामे हैं, साथ ही एक देसी पिस्तौल और लापता महिला के कपड़े भी उन्होंने बरामद किए हैं।

‘हत्या की शिकार’ यह महिला पिछले हफ्ते अपने गांव में केवल यह पता लगाने पहुंची कि उसके परिवार के तीन सदस्य जेल में थे या नहीं। महिला ने कहा कि वह घर छोड़ने के बाद अपने प्रेमी के साथ दिल्ली में रह रही थी।

‘हत्या’ की जांच का नेतृत्व करने वाले एसएचओ को अब निलंबित कर दिया गया है और मामले में जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।

अमरोहा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विपिन ताडा ने पुष्टि की कि आदमपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ अशोक शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि महिला के परिवार के सदस्यों के खिलाफ लगा हत्या का आरोप अब हटा दिया जाएगा और वे जल्द ही जेल से बाहर आ जाएंगे।

एसपी ने कहा, “महिला को अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसका बयान दर्ज किया जाएगा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के अंडर में मामले की जांच शुरू कर दी गई है।”

खबरों के मुताबिक महिला फरवरी 2019 में लापता हो गई थी। उसके परिवार को शक था कि वह अपने प्रेमी के साथ भाग गई होगी लेकिन महीनों की जांच के बाद स्थानीय पुलिस ने उसके पिता, भाई और एक रिश्तेदार पर उसकी हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था।

महिला एक भाई राहुल कुमार ने कहा, “पहले उन्होंने दिनेश को प्रताड़ित कर उसके कबूलनामे का वीडियो बनाया फिर इसे दिखाकर मेरे पिता और भाई को प्रताड़ित किया। पुलिस ने इन तीनों को बहुत पीटा ताकि वे स्वीकार कर लें कि उन्होंने मेरी बहन को मार डाला था।”

परिवार ने कहा कि बरामद किए गए कपड़े भी कथित तौर पर ‘लापता’ हुई महिला के नहीं थे।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस

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