इंदौर में छेड़छाड़ से परेशान नाबालिग छात्रा ने आत्महत्या की

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मध्य प्रदेश के इंदौर में गुरुवार को 10वीं की छात्रा ने छेड़छाड़ से परेशान होकर फांसी के फंदे से लटककर जान दे दी। इस घटना के बाद थाने के सब इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, द्वारका थाना क्षेत्र के प्रजापत नगर की नाबालिग छात्रा ने गुरुवार रात को घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 10वीं कक्षा की यह छात्रा सुसाइड नोट छोड़कर गई है, जिसमें उसने एक युवक द्वारा परेशान किए जाने का जिक्र किया है। सुसाइड नोट में लिखा है कि आरोपी उसे सोशल साइट पर ब्लैकमेल करने की धमकी भी देता था।

परिजनों के अनुसार, आरोपी की थाने में भी शिकायत की गई लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोपी मिलन ने कुछ तस्वीरें भी वाट्सएप पर वायरल कर दी थी जिससे परेशान होकर बच्ची ने यह कदम उठाया।

पुलिस उप महानिरीक्षक हरिनारायण चारी मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया, “द्वारका थाने के सब इंस्पेक्टर ओमकार सिंह कुशवाहा को निलंबित कर दिया गया है और मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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