सीएजी ने किया खुलासा,कहा रफ़ाल बनाने वाली कंपनी ने पूरा नहीं किया भारत से अपना वादा

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राफेल विमान सौदा एक फिर चर्चा में है।भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) का कहना है कि फ़ाइटर जेट रफ़ाल के निर्माताओं ने भारत के साथ रक्षा सौदे के तहत जिन ऑफ़सेट दायित्वों के निर्वहन की बात कही थी, उन्हें पूरा नहीं किया गया है और ना ही अब तक भारत को किसी उच्च स्तरीय तकनीक की पेशकश की गई है।

संसद में बुधवार को पेश कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत बड़े पैमाने पर विदेशों से हथियारों की खरीद करता है। रक्षा खरीद नीति के तहत 30 फीसदी ऑफसेट प्रावधान लागू किए गए हैं।
सीएजी ने अपने बयान में कहा,”यह पाया गया कि विदेशी विक्रेताओं ने मुख्य आपूर्ति अनुबंध के लिए योग्यता प्राप्त करने के लिए कई ऑफ़सेट प्रतिबद्धताएं ज़ाहिर तो कीं, लेकिन बाद में वो इन्हें पूरा करने के लिए गंभीर नहीं दिखे।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2005-2018 के बीच रक्षा सौदों में कुल 46 ऑफसेट काट्रेक्ट किए गए जिनका कुल मूल्य 66427 करोड़ रुपये था। लेकिन दिसंबर 2018 तक इनमें से 19223 करोड़ के ऑफसेट कांट्रेक्ट ही पूरे हुए। हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इसमें भी 11396 करोड़ के क्लेम ही उपयुक्त पाए। बाकी को खारिज कर दिए गए।
सीएजी ने कहा है कि “लगभग 55,000 करोड़ रुपये की शेष ऑफ़सेट प्रतिबद्धताएं 2024 तक पूरी होने वाली हैं. विदेशी विक्रेताओं ने लगभग 1,300 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की दर से ऑफ़सेट प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है। इस स्थिति को देखते हुए विक्रेताओं द्वारा अगले छह वर्ष में 55 हज़ार करोड़ रुपये की प्रतिबद्धताओं को पूरा कर पाना, वाक़ई एक बड़ी चुनौती है।”

तय नियमों के तहत इन्हें 2024 तक पूरा किया जाना है। ऑफसेट प्रावधानों को कई तरीके से पूरा किया जा सकता है। जैसे देश में रक्षा क्षेत्र में निवेश के जरिये, निशुल्क तकनीक देकर तथा भारतीय कंपनियों से उत्पाद बनाकर। लेकिन सीएजी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में पाया है कि यह नीति अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पा रही है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि खरीद नीति में सालाना आधार पर ऑफसेट कांट्रेक्ट को पूरा करने का प्रावधान नहीं किया गया है। पुराने मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि आखिर के दो सालों में ही ज्यादातर कांट्रेक्ट पूरे किए जाते हैं।

इस पूरे मामले में कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए मोदी सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है।
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ नहीं बल्कि यह तो ‘मेक इन फ़्रांस’ हो गया है।
वहीं पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम ने भी सरकार पर हमला किया है. उन्होंने ट्वीट किया, “सीएजी ने पाया है कि रफ़ाल एयरक्राफ़्ट के वेंडर्स ने अभी तक ऑफ़सेट समझौते के तहत टेक्निकल सहायता देने की शर्त को पूरा नहीं किया है।ऑफ़सेट दायित्व 23 सितंबर, 2019 को शुरू होकर एक साल बाद 23 सितंबर, 2020 तक पहली वार्षिक प्रतिबद्धता ख़त्म हो जानी चाहिए थी।क्या सरकार बताएगी कि ये दायित्व पूरे हुए या नहीं? सीएजी की रिपोर्ट क्या गड़बड़ियों का पिटारा खोल रही है?”

आपकों बता दें साल 2010 में यूपीए सरकार ने रफ़ाल फ़ाइटर जेट ख़रीदने की प्रक्रिया शुरू की थी।2012 से 2015 तक भारत और फ़्रांस के बीच बातचीत चलती रही. इस बीच, 2014 में यूपीए की जगह सत्ता में आयी मोदी सरकार ने सितंबर 2016 में रफ़ाल समझौते पर हस्ताक्षर किये।36 विमान ख़रीदने की डील हुई जिसकी क़ीमत क़रीब 59 हज़ार करोड़ रुपये बतायी गई।

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