Microsoft के सह-संस्थापक के पिता बिल गेट्स सीनियर का निधन

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माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापकबिल गेट्स के पिता विलियम एच. गेट्स द्वितीय का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे एक वकील और परोपकारी व्यक्ति थे। परिवार ने मंगलवार को घोषणा की कि वॉशिंगटन राज्य के समुद्र तट पर बने उनके घर में अल्जाइमर रोग के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

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बिल गेट्स ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “मेरे पिता की बुद्धिमत्ता, उदारता, सहानुभूति और विनम्रता का दुनिया भर के लोगों पर बहुत प्रभाव था। मैं जैसे-जैसे बड़ा होता गया, मैं अपने जीवन में किए गए लगभग हर काम पर अपने पिता के प्रभाव की सराहना करने लगा। माइक्रोसॉफ्ट के शुरूआती वर्षों में मैंने उनसे अहम कानूनी परामर्श लिया था।”

उन्होंने कहा कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन अब उनके पिता के बिना वैसा नहीं रहेगा जैसा पहले था।

उन्होंने आगे कहा, “इस फाउंडेशन की नींव के मूल्यों को उन्हीं ने आकार दिया था। वह अच्छे सहयोगी, विवेकपूर्ण और सीखने को लेकर गंभीर व्यक्ति थे। बिल गेट्स के बेटे होने का अनुभव अविश्वसनीय है। लोग मेरे पिताजी से पूछते थे कि क्या वह असली बिल गेट्स हैं। मैं उन्हें हर दिन याद करूंगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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