महिलाओं की तुलना में पुरुष दर्द के प्रति ज्यादा संवेदनशील : शोध

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पुरुषों की तुलना में महिलाएं सहन किए गए ज्यादा दर्द को जल्दी भूल जाती हैं। चूहे व मानव पर किए गए एक शोध में इसकी पुष्टि हुई है। कनाडा की टोरंटो मिसिसॉगा विश्वविद्यालय (यूटीएम) के शोधकर्ताओं के शोध में पता चला है कि महिला व पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों को अलग-अलग तरीके से याद रखते हैं।

पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों स्पष्ट तौर पर याद रखते हैं, जबकि महिलाएं दर्द के प्रति बेपरवाह रवैया अपनाती हैं। इसी तरह के परिणाम नर व मादा चूहों में देखने को मिले।

पुरुष जब दर्द का अनुभव दोबारा करने पर अतिसंवेदनशील रवैया दिखाते हैं, लेकिन महिलाएं अपने दर्द के पूर्व अनुभव से तनाव नहीं लेती हैं।

यूटीएम के सहायक प्रोफेसर लोरेन मार्टिन ने कहा, “अगर दर्द की याद, दर्द के लिए प्रेरक का कार्य करती है और हम समझते हैं कि दर्द को कैसे याद रखा जाए तो यादाश्त पर क्रियाविधि का इस्तेमाल करके हम कुछ पीड़ितों की मदद करने में समर्थ हो सकते हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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