मसाला फिल्मों से करते रहेंगे मनोरंजन : अली अब्बास जफर

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फिल्म ‘भारत’ की सफलता से ऊंचाईयों को छू रहे निर्देशक अली अब्बास जफर का कहना है कि वह कहानी कहने की कला का महत्व जानते हैं और वह ‘पूर्णरूप से मसाला फिल्मों से मनोरंजन’ करते रहेंगे। जफर ने एक बयान में कहा, “दर्शकों से मिल रहे प्यार की अनुभूति काफी सुखद है। जब मैं कोई फिल्म बनाने की सोचता हूं, तब मैं रिकॉर्ड के बारे में नहीं सोचता हूं। उस तक मेरी पहुंच नहीं रहती है।”

बकौल जफर, “यह किसी भी फिल्म-निमार्ता के लिए एक बेहद सीमित दबाव बनाने वाला प्रस्ताव हो सकता है, खासकर मेरे लिए, क्योंकि मैं कहानी को महत्व देता हूं। मैं हमेशा एक कहानी सुनाने के लिए तैयार रहता हूं और शुक्र है कि दर्शकों को मेरी कहानी कहने का तरीका पसंद आता है।”

फिल्म ‘भारत’ ने अपनी रिलीज के चौथे दिन भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था और अब 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।

जफर ने इसके पहले ‘टाइगर जिंदा है’ और ‘सुल्तान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई है। उनका कहना है कि वह आगे भी बड़े पैमाने पर भावुक फिल्में बनाते रहेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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