अंतरिक्ष में अनेक प्रकार के ब्लैक होल रखते कई तरह की खासियत, जानियें

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जयपुर। ब्रह्माण्ड में कई प्रकार के ब्लैक होल हैं जिनके कई तरह के भौतिक गुण होते हैं। जैसा कि हम जानते है कि जो तारे मरते है वहीं ब्लैक होल का निर्माण करते है और ऐसे ब्लैक होल को तारकीय द्रव्यमान ब्लैक होल कहते हैं। इसी तरह से जिन ब्लैक होल का निर्माण आकाशगंगाओं के केंद्र में होता है उनको अतिसहंत ब्लैक होल कहलाते हैं। इनका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान की तुलना में लाखों-करोड़ों गुना अधिक होता है और यह बहुत ही शक्तिशाली होते है। वैज्ञानिकों के अनुसार बताया गया है कि हमारी आकाशगंगा-दुग्धमेखला के केंद्र में एक विशाल ब्लैक होल हैं

और इसका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से एक करोड़ गुना आंका गया है। अध्ययन के मुताबिक ऐसे ब्लैक होल जिनका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से भी कम होता है, उनका निर्माण गुरुत्वीय संकुचन के कारण न होकर  अपने केंद्र भाग के पदार्थ का दाब एवं ताप के कारण संपीडित होने से होता है और बता दे कि ऐसे ब्लैक होल को प्राचीन ब्लैक होल  या लघु ब्लैक होल कहते हैं। इन लघु ब्लैक होल के बारे में वैज्ञानिकों कहते है कि इनका निर्माण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के समय हुआ होगा। भौतिकविद् स्टीफन हाकिंग मानते है कि हम ऐसे ब्लैक होलों के अध्ययन से ब्रह्माण्ड की आरंभिक अवस्थाओं के बारे में बहुत कुछ पता लगा सकते हैं।

1963 में न्यूजीलैंड के एक गणितज्ञ व वैज्ञानिक रॉय केर ने  घूर्णनशील ब्लैक होलों  के अस्तित्व को गणितीय आधार के बारे में बताया था। इन्होंने बताया कि इन कृष्ण विवरों का आकार इनकें घूर्णन दर और द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जानकारी के लिए बता दे कि ऐसे ब्लैक होल को वर्तमान में वैज्ञानिक केर का ब्लैक होल कहकर संबोधित करते हैं। बता दे कि इनकी संरचना बहुत जटिलता होती हैं और इनकी घटना क्षितिज भी गोलाभ होती हैं। सबसे खास बात तो यह कि ऐसे ब्लैक होल जो घूर्णन नही करतें हैं ये स्क्वार्जस्चिल्ड ब्लैक होल कहलाते हैं।

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