स्कूल बैग का बोझ कम कर रहे हैं कई राज्य

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय व सीबीएसई नियमित रूप से छात्रों के बस्ते के बोझ को कम करने संबंधी कार्यक्रम व सुझावों पर काम कर रहे हैं। इस संबंध में स्कूलों, अध्यापकों व अभिभावकों से आवश्यक सलाह भी ली एवं दी जाती है। यह जानकारी गुरुवार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दी। राज्य सभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए निशंक ने कहा कि पिछले वर्ष उनके मंत्रालय ने स्कूल बैग हल्का करने को लेकर सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से संपर्क किया था। इस दौरान इन राज्य सरकार से स्कूल बैग हल्के करने संबंधी नीति पर काम करने को कहा गया था।

निशंक के मुताबिक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा, केरल, गुजरात, हरियाणा, मिजोरम, असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश आदि कई राज्यों ने स्कूल बैग हल्का करने को लेकर जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं।

निशंक ने कहा कि विभिन्न राज्यों को निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है कि स्कूलों की एसेंबली के दौरान विटामिन-डी की कमी पर व्याख्यान किए जाएं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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