कई लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है ये कुर्सी, जानिए क्या है पूरा मामला

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दोस्तों, आज राजनेता कुर्सी को पाने के लिए पता नहीं क्या क्या करते हैं मगर आज हम आपको एक ऐसी कुर्सी के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि अब तक कई लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है । दरअसल, इंग्लैंड में मौजूद एक कुर्सी को मौत की कुर्सी कहा जाता है । यह कुर्सी थॉमस बस्बी नाम के एक शख्स की पसंदीदा कुर्सियों में से एक थी, वह इस कुर्सी पर किसी को बैठा हुआ नहीं देख सकते थे ।

बताया जाता है कि साल 1709 में एक बार उनके ससुर इस कुर्सी पर बैठ गए थे जिसके बाद इस शख्स ने ससुर को मौत के घाट उतार दिया । इसके बाद से किसी ने भी इस कुर्सी पर बैठने की हिम्मत नहीं दिखाई । कई लोगों का ऐसा कहना है कि, अपने आखिरी दिनों में थॉमस इस कुर्सी को श्राप दे गए कि जो भी इस कुर्सी पर बैठेगा उसकी मौत हो जाएगी । हालांकि इसके बाद उनके इस श्राप पर लोगों ने ध्यान नहीं दिया था ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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