डूबते जेट एयरवेज के समक्ष कई चुनौतियां

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लगभंग बंद हो चुकी जेट एयरवेज को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि साझेदार एतिहाद एयरवेज के सुझाव पर एयरलाइन के लिए एक खरीदार खोजने के ऋणदाताओं के कदम को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके प्रमुख मुद्दों में बैंकिंग नियामक आरबीआई से आवश्यक दिशानिर्देश के अभाव में कर्जदाताओं के कर्ज का इक्विटी में रूपांतरण और पर्याप्त स्वामित्व और प्रबंधन नियंत्रण पर स्पष्टता शामिल है।

प्रमोटर समूह के नजदीकी एक व्यक्ति ने कहा, “मुद्दा यह है कि जब तक यह सब होगा, तब तक बहुत देर हो जाएगी। पूरी लीडरशिप टीम पहले ही जा चुकी है। एयरलाइन बोर्ड में बहुत ही कम संख्या है..इसमें सिर्फ तीन सदस्य बचे हैं।”

उन्होंने संदेह जताते हुए कहा कि अगर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले कर्जदाता एयरलाइन के लिए एक बहुसंख्यक खरीदार खोजने में समर्थ होगे तो एयरलाइन की अनिश्चित वित्तीय स्थिति में बदलाव हो सकती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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