मनोज वाजपेयी ने शेखर कपूर के साथ ‘बैंडिट क्वीन’ के दिनों को याद किया

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अभिनेता मनोज वाजपेयी वर्तमान में उत्तराखंड में प्रकृति के बीच अपने लॉकडाउन के दिनों को बिता रहे हैं। सोमवार को उन्हें अपने पहले निर्देशक शेखर कपूर से एक सरप्राइज मिला। मनोज ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्हें अपनी पत्नी व पूर्व अभिनेत्री नेहा और फिल्म निर्माता शेखर कपूर के साथ देखा जा सकता है।

इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “मिस्टर शेखर कपूर हमें हाय कहने आए थे, हमारे साथ दोपहर का भोजन भी किया। एक दोपहर बैंडिट क्वीन की यादों से भर उठी। हमारे लिए यह मास्टर क्लास था। शेखर कपूर को खास महसूस हुआ।” गौरतलब है कि मनोज ने कपूर की ‘बैंडिट क्वीन’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। उन्होंने आगे लिखा, “एक दोपहर अच्छी बीती..मेरे पहले निर्देशक।”

मनोज एक आगामी वेब सीरीज की शूटिंग दीपक डोबरियाल के साथ कर रहे थे। तभी लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। तब से वह अपने परिवार और क्रू टीम के साथ वहीं रह रहे हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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