मनोज बाजपेयी बड़े पर्दे पर विकास दुबे का किरदार निभाने को तैयार

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अभिनेता मनोज बाजपेयी का कहना है कि उप्र के गैंगस्टर विकास दुबे के नाटकीय जीवन को बड़े पर्दे पर दिखाना दिलचस्प होगा। गौरतलब है कि शुक्रवार को खूंखार गैंगस्टर की कथित मुठभेड़ की खबर के बाद नेटिजेंस ने उसी पर बॉलीवुड फिल्म बनने की संभावना पर चर्चा शुरू कर दी है।

निर्माता संदीप कपूर ने यह भी सुझाव दिया कि एक फिल्म बनाई जाए, जिसमें मनोज बाजपेयी गैंगस्टर की भूमिका निभाएं।

कपूर ने ट्वीट किया, “आज मुठभेड़ में जो कुछ हुआ है वह सिनेमाई और नाटकीय अनुभव से परे है। मनोज बाजपेयी आपके अगले प्रोजेक्ट में विकास दुबे का किरदार निभाने को लेकर क्या विचार? आप आग लगा देंगे।”

इस पर मनोज ने कहा, “मैं सुन रहा हूं कि बहुत सारे लोग इस भूमिका में मुझे लेकर चर्चा कर रहे हैं। यदि चरित्र और पटकथा अच्छी है, तो कोई भी वास्तविक जीवन का किरदार निभाना मजेदार होगा। उक्त व्यक्ति का जीवन बहुत ही नाटकीय रहा है और उसके जीवन को बड़े पर्दे पर लाना बहुत दिलचस्प होगा। चलिए देखते हैं क्या होता है। मैं इस किरदार को निभाने के लिए उत्साहित हूं।”

बताया जा रहा है कि संदीप गैंगस्टर की बायोपिक बनाने के अधिकार हासिल करने की प्रक्रिया में हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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