मनीष सिसोदिया के ओएसडी को न्यायिक हिरासत में भेजा

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दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया के ओएसडी (आफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) गोपाल कृष्ण माधव को रिश्वत मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने माधव को विधानसभा चुनाव से पहले पांच फरवरी को गिरफ्तार किया था। उन्हें दो लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद माधव को एजेंसी की हिरासत में भेज दिया गया, जिसे फिर से 14 फरवरी तक बढ़ा दिया गया था। उन्हें रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान के सामने पेश किया गया।

सिसोदिया ने गिरफ्तार अधिकारी को कड़ी सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा, “सीबीआई को उसके लिए सख्त सजा सुनिश्चित करनी चाहिए। मैंने पिछले पांच सालों में ऐसे कई भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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