मणिकर्णिका समीक्षा- हाथो में तलवार, आंखो में ज्वाला लिए झांसी की रानी बनी कंगना, डायरेक्टरी के चलते भूल बैठी अभिनय के गुण

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बॉलीवुड में इस साल की मोस्ट अवेटेड फिल्म मणिकर्णिका रिलीज हो चुकी है ये फिल्म झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है।फिल्म को पहले कृष ने डायरेक्ट किया था लेकिन किसी मसले की वजह से फिल्म के डायरेक्टर की हेट कंगना ने पहनी और इसी प्रकार शुरु हुई मणिकर्णिका की कहानी।फिल्म के ट्रेलर को जिस तरह मिले जुले रिव्यूज मिले थे फिल्म को भी उसी हाल से गुजरना पड़ा जी हां बताया जा रहा था इस फिल्म के लिए टीम ने कड़ी मेहनत की है जिसके चलते मेकर्स ने फिल्म के लिए खूब खोज की है तो वही फिल्म के हर सीन को परफेक्ट सीन करने के लिए उसका हर बार रिव्यू लिया है।

अब लीजिए फिल्म रिलीज हो चुकी है।आपको बता दे मणिकर्णिका की कहानी बाहुबली लिखने वाले विजयेन्द्र प्रसाद ने लिखी वही सेंसर चीफ प्रसून जोशी ने डायलॉग लिखे हैं।फिल्म में झांसी की रानी की कहानी दिखाई गई है गौरतलब है 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गईं थी ये ही फिल्म की कहानी में मुख्य तौर पर दर्शाया गया है। फिल्म को कमल जैन और निशांत पिट्टी ने प्रोड्यूस किया है।

फिल्म को भव्य तरीके से तैयार किया गया है लेकिन इसके बावजूद फिल्म के विजुल्स का दर्शको पर कोई खास असर नहीं पड़ सका।फिल्म को देखकर जहां हर किसी में देशभक्ति का ज्जबा पैदा होना चाहिए था ऐसा कंगना की आवाज में नहीं हो पाता।

आमतौर पर एक ऐतिहासिक फिल्म में कंगना ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन ये फिल्म बॉलीवुड की तमाम ऐतिहासिक फिल्मों को कही नहीं छुती।फिल्म में कंगना का जोश कभी कभी उनकी ओवर एक्टिंग का संकेत करता है तो वही दूसरी तरफ कंगना पर लडाई का रुतबा तो अच्छा लगता है लेकिन इमोशनल होना उनकी एक्टिंग को भारी करार देता है।

फिल्म को पांच में से तीन रेटिंग दी गई है।फिल्म में कंगना की मर्दानी को दर्शक पसंद कर रहे है।वही फिल्म में स्टार कास्ट या तो डेब्यू करने वाली है या फिर वो जो कि बॉलीवुड से बहुत पहले रिटार्ड हो चुके है ऐसे में देखना दिलचस्र्प होगा फिल्म कितनी कमाई कर पाती है।

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