मणप्पुरम फाइनेंस का शुद्ध लाभ 82 प्रतिशत बढ़ा

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मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड ने 30 सितंबर, 2019 को समाप्त तिमाही के लिए समेकित शुद्ध लाभ की घोषणा की जो 82 प्रतिशत की वृद्धि के साथ शुद्ध लाभ 402.28 करोड़ तक पहुंच गया। गत वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 221.39 करोड़ दर्ज किया गया था। मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड (सहायक कंपनियों को छोड़कर) का शुद्ध लाभ 334.72 करोड़ दर्ज किया गया है। इस तिमाही के दौरान, 26.85 प्रतिशत की वृद्धि के साथ परिचालन से होने वाली कुल समेकित आय 1,286.78 करोड़ दर्ज की गई, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 1,014.44 करोड़ थी। 31.91 प्रतिशत की वृद्धि के साथ, कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (अवट) 22,676.93 दर्ज की गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही के दौरान 17,190.70 करोड़ थी।

कंपनी ने गुरुवार की बैठक में 2 के फेस वैल्यू के साथ प्रति शेयर 0.55 के अंतरिम लाभांश को मंजूरी दी।

तिमाही के परिणामों पर एमडी एवं सीईओ वी.पी. नंदकुमार ने कहा, “हमने कुल कारोबार के साथ-साथ लाभप्रदता के संदर्भ में भी काफी प्रगति की है, जिसका श्रेय हमारे सभी वर्टिकल द्वारा हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन को जाता है। निश्चित तौर पर हम भविष्य में इसी गति को बरकरार रखते हुए आगे बढ़ेंगे।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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