Bihar में व्यक्ति ने पत्नी और 5 बच्चों को काटा, 4 की मौत

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बिहार के सीवान जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और पांच बच्चों को फसुली (एक प्रकार का धारदार हथियार) से वार कर हत्या कर दी। हत्या के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। घटना की पुष्टि करते हुए भगवानपुर के थाना प्रभारी विपिन सिंह ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि बलहा अलिमर्दनपुर गांव में सोमवार की आधी रात अवधेश चौधरी ने अपनी पत्नी और पांच बच्चों को फसुली से काट डाला। इस घटना में चार बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई है वहीं पत्नी और एक बच्चा गंभीर रूप से घायल है। मरने वालों में तीन बेटे और एक बेटी है।

सिंह ने बताया कि घायलों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल मंे भर्ती कराया गया, जहां से चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना रेफर कर दिया।

थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उससे पूछताछ की जा रही है। हत्या के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है, पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

श्रन्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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