डेटा उपलब्ध कराने में पारदर्शिता की कमी’ को लेकर Mamta का सरकार पर निशाना

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘नागरिकों को डेटा प्रदान करने में पारदर्शिता की कमी’ को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, “आज ‘इंटरनेशनल डे फॉर यूनिवर्सल एक्सेस टू इनफॉर्मेशन’ (सूचना के लिए सार्वभौमिक पहुंच के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) है। यह हैरतअंगेज कर देने वाला है कि हालिया संसद सत्र के दौरान भारत सरकार कैसे उजागर हुई।”

ममता ने कहा कि लॉकडाउन के तुरंत बाद अपने गांवों में लौटने के दौरान मरने वाले प्रवासियों की संख्या या कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई के दौरान मरने वाले डॉक्टरों की संख्या के बारे में संसद में पूछे जाने पर ‘कोई डेटा उपलब्ध नहीं’ होने का केंद्र सरकार का रुख था।

उन्होंने कहा, “प्रत्येक नागरिक को सूचना का अधिकार है। सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह है।”

मुख्यमंत्री ने पिछले सप्ताह राज्यसभा के आठ सदस्यों के निलंबन के बाद केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया था और घोषणा की थी कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस कृषि विधेयकों पर ‘अलोकतांत्रिक’ कदम के विरोध में सड़कों पर उतरेगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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