कोरोना एक्सप्रेस के बयान पर घिरीं ममता बनर्जी, भाजपा सांसद ने कहा, मजदूरों से मांगें माफी

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को ‘कोरोना एक्सप्रेस’ बताने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पश्चिम बंगाल के भाजपा सांसद ने प्रवासी मजदूरों की तुलना वायरस से किए जाने को उनका अपमान बताते हुए मेहनतकश जनता से माफी मांगने की मांग की है। दार्जिलिंग लोकसभा सीट से सांसद राजू बिष्ट ने ममता बनर्जी के इस कमेंट पर नाराजगी जताते हुए निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि एक तो राज्य सरकार अपने लोगों को वापस लाने में सहयोग नहीं कर रही है, दूसरी तरफ केंद्र सरकार की मदद से जो लोग ट्रेनों से लौट रहे हैं तो उनकी तुलना वायरस से कर अपमान कर रहीं हैं।

दरअसल, बीते शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को जिम्मेदार ठहराते हुए कोरोना एक्सप्रेस बताया था।

भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने आईएएनएस से कहा, “पश्चिम बंगाल के बाहर अपनी आजीविका के गए लोगों के संकट की इस घड़ी में लौटने पर उनकी वायरस से तुलना करना शर्मनाक है। अगर 34 वर्षों के कम्युनिस्ट और नौ साल के तृणमूल कांग्रेस सरकार के कुशासन ने पश्चिम बंगाल की आर्थिक रीढ़ न तोड़ी होती तो राज्य के लोगों को कमाने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। आज पश्चिम बंगाल की जनता पर 4.7 लाख करोड़ का कर्ज है।”

भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि राज्य की खराब हालत के कारण प्रतिभाशाली और हुनरमंद लोगों को बाहर रोजगार के लिए जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। राज्य में कंपनियों के निवेश के खिलाफ आंदोलन कर ममता बनर्जी सत्ता में आईं और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता बचे-खुचे उद्ममियों को भी धमकाने और उनसे उगाही करने में जुटे हैं। कट मनी सिस्टम और सिंडीकेट राज के कारण पश्चिम बंगाल में ईमानदारी से आजीविका कमाना मुश्किल हो गया है।

भाजपा सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल को अपने लोगों को वापस लाने के लिए राज्यों को अनुमति दी, बावजूद इसके पश्चिम बंगाल सरकार ने इस दिशा में पहल नहीं की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य में ट्रेनों को आने की अनुमति देने से मुकरतीं रहीं। जबकि दूसरे राज्य बाहर फंसे अपने लोगों को राशन और आर्थिक सहायता देते में जुटे रहे।

राजू बिष्ट ने कहा कि अपने हाल पर छोड़ दिए गए राज्य के प्रवासी मजदूर जब ट्रेनों से लौटने लगे तो अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को कोरोना एक्सप्रेस कहकर उनके जख्मों पर नमक छिड़का जा रहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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