एक और मामले में मलविंदर सिंह की औपचारिक गिरफ्तारी

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रैनबैक्सी और फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह (47) को धोखाधड़ी के एक और मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मंगलवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। मलविंदर सिंह एक अन्य मामले में पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं। मलविंदर सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409/120 बी के तहत अपराध शाखा पुलिस के पास प्राथमिकी संख्या 189/19 दर्ज की गई है।

मामले में रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) ने आरोप लगाया है कि मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह ने लक्ष्मी विलास बैंक लिमिटेड (एलवीएल) के कर्मचारियों की मिलीभगत से 400 करोड़ और 350 करोड़ रुपये की राशि की कंपनी की दो एफडी का गबन किया।

जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने इन दोनों एफडीआर (फिक्स्ड डिपोजिट रसीद) के एवज में अपनी कंपनी आरएचएस होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए कर्ज लिया और बाद में व्यक्तिगत जिम्मेदारी से मुकर गए।

प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी व्यक्ति अपने निजी लाभ के लिए गुप्त तरीके से लगातार सार्वजनिक धन की हेराफेरी करते रहे हैं।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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