मल्हार राव का किरदार अपनी समृद्ध संस्कृति के करीब ले आया : Rajesh Shringarpore

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अभिनेता राजेश श्रृंगारपोरे खुद को खुशकिस्मत समझते हैं कि उन्हें टेलीविजन पर मल्हार रॉव होल्कर के किरदार को निभाने और उस पुराने दौर में जीने का मौका मिला है। टेलीविजन धारावाहिक ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई’ 18वीं शताब्दी की पृष्ठभूमि पर आधारित है और यह मालवा की रानी अहिल्याबाई होल्कर की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है।

इसमें अहिल्याबाई होल्कर के सफर की वीर गाथाओं को संजोया गया है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह से वह अपने ससुर मल्हार रॉव होल्कर का समर्थन पाकर पितृसत्तात्मक समाज के मानदंडों का विरोध करती हैं।

शो में मराठा साम्राज्य के प्रमुख सूबेदारों में से एक मल्हार रॉव का किरदार निभा रहे राजेश ने कहा, ” ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई’ मेरे लिए स्पेशल है। इस शो का हिस्सा बनकर मुझे जिंदगी की कई अहम सीखें मिलीं। मल्हार रॉव का किरदार निभाकर मैं अपनी भूमि, अपने देश और अपनी समृद्ध संस्कृति के करीब आया हूं। मैं इस शो का हिस्सा बनकर खुद को सम्मानित महसूस करता हूं, जो वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर की गाथाओं पर आधारित है।”

इस शो को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर प्रसारित किया जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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