मलाला यूसुफजई को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने सम्मानित किया

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नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उनके वैश्विक कार्य के लिए सम्मानित किया है। 21 वर्षीय मलाला को लड़कियों को 12 साल की मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा से लैस करने के लिए हार्वर्ड केनेडी स्कूल में सार्वजनिक नेतृत्व केंद्र से गुरुवार को 2018 ग्लीट्समैन पुरस्कार प्राप्त हुआ।

एनबीसी टीवी नेटवर्क के अनुसार, हार्वर्ड केनेडी स्कूल में एक सार्वजनिक समारोह में मलाला को यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

साल 2014 में मलाला को बच्चों के अधिकारों के लिए प्रयास करने को लेकर नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली वह सबसे कम उम्र की विजेता रहीं। अक्टूबर 2012 में जब वह पाकिस्तान की स्वात घाटी के अपने स्कूल से लौट रही थीं, तब तालिबान बंदूकधारियों ने उन्हें गोली मार दी थी। मलाला अब इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की छात्रा हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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