स्कूलों में काव्यपाठ को अनिवार्य बनाएं : उपराष्ट्रपति नायडू

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उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को सभी स्कूलों से आग्रह किया कि वे काव्यपाठ को पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा बनाए। उन्होंने कहा, “मैं स्कूलों से आग्रह करता हूं कि वे काव्यपाठ को पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा बनाएं। मैं विश्वविद्यालयों से भी आग्रह करता हूं कि वे साहित्य, कला और मानविकी शिक्षा को प्रोत्साहित करें।”

उपराष्ट्रपति ने यहां कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में 39वें विश्व कांग्रेस के कवियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “मेरा मानना है कि ज्ञानी और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए कला और संस्कृति को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।”

नायडू ने कहा, “कवि प्रभावित करने वाले और राय देने वाले हो सकते हैं। उनके पास विचारों, भावनाओं और ²ष्टिकोण को आकार देने की अद्वितीय क्षमता होती है। मुझे पूरा यकीन है कि वे इस जबरदस्त शक्ति का इस्तेमाल करके एक बेहतर दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “कलाकारों ने जीवन को जीवंत किया। कुछ ने तो हमारी जिंदगियां बदल दी। उन्होंने हमारी अनुभूति और दुनिया देखने का हमारा नजरिया दोनों को बदलकर रख दिया। कलाकार लगातार सवाल के माध्यम से समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ाने में मदद करते हैं”

उन्होंने कहा कि कविता समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने और सार्वभौमिक भाईचारे को बढ़ावा देने में मदद करती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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